आगामी पंचायती राज चुनावों से ठीक पहले बाड़मेर जिले में राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां कांग्रेस पार्टी ने अपनी आंतरिक गुटबाजी और मतभेदों को खत्म करने के लिए ठोस और गंभीर प्रयास तेज कर दिए हैं। इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के बाद से जिले के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और कार्यकर्ताओं में नए उत्साह का संचार हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर एकता स्थापित होने से आगामी चुनावों में इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
इस पूरी रणनीति का मुख्य केंद्र बाड़मेर का शिव क्षेत्र रहा है, जहां कांग्रेस के कद्दावर नेता अमीन खान और फतेह खान के एक साथ आने से पार्टी की स्थिति काफी मजबूत होती हुई दिखाई दे रही है। ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र में नेताओं के बीच आपसी खींचतान और गुटबाजी के चलते पार्टी को कई बार नुकसान का सामना करना पड़ा था। अब इन दोनों प्रमुख नेताओं के एक मंच पर आने से स्थानीय स्तर पर पार्टी के भीतर चल रहे गतिरोध के समाप्त होने की पूरी उम्मीद बंध गई है।
पंचायती राज चुनावों के मद्देनजर बाड़मेर जिले में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है और सभी दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां पुख्ता करनी शुरू कर दी हैं। कांग्रेस पार्टी द्वारा अमीन खान और फतेह खान को साथ लाकर एक मजबूत संदेश देने की कोशिश की जा रही है, ताकि ग्रामीण मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ को और अधिक पुख्ता किया जा सके। स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से यह मेल-मिलाप चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
क्षेत्रीय मतदाताओं और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमीन खान और फतेह खान की यह एकजुटता न केवल चुनावी कैंपेन को गति देगी, बल्कि कार्यकर्ताओं के मन में चल रहे असमंजस को भी दूर करेगी। स्थानीय स्तर पर आम नागरिकों और व्यापारियों का भी यही आकलन है कि जब तक राजनीतिक दल आंतरिक रूप से एकजुट नहीं होते, तब तक वे जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। इस लिहाज से इस कदम को एक सकारात्मक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
एक तरफ जहां कांग्रेस अपने कुनबे को एकजुट करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी भी पूरी तरह से सक्रिय होकर चुनावी मैदान में अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाने में लगी हुई है। भाजपा इस बार बाड़मेर में जिला प्रमुख की कुर्सी पर कब्जा जमाने की पुरजोर तैयारी कर रही है और इसके लिए हरसंभव राजनीतिक समीकरण साधे जा रहे हैं। विपक्षी दल की इस सक्रियता के कारण बाड़मेर का चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा होने की संभावना जताई जा रही है।
स्थानीय प्रशासन और निर्वाचन विभाग भी चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं ताकि पंचायती राज चुनावों को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराया जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आदर्श आचार संहिता की पालना सुनिश्चित करने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। राजनीतिक दलों की बढ़ती गतिविधियों के बीच प्रशासनिक स्तर पर भी पूरी मुस्तैदी बरती जा रही है ताकि कानून व्यवस्था पूरी तरह से नियंत्रण में रहे।
आगामी दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अमीन खान और फतेह खान की यह जोड़ी जमीनी स्तर पर कितनी कारगर साबित होती है और कांग्रेस पार्टी को इसका कितना चुनावी लाभ मिलता है। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही प्रचार अभियान और अधिक तेज होगा, जिसमें दोनों ही प्रमुख दल अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए नजर आएंगे। जनता की निगाहें अब पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि कौन सा दल स्थानीय विकास के मुद्दों पर खरा उतरते हुए बाड़मेर की राजनीति में अपना वर्चस्व स्थापित कर पाता है।