पर्यूषण पर्व के इस पवित्र और पावन अवसर पर सिरोही जिले में स्थित प्राचीन जैन तीर्थ स्थल श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और धार्मिक उत्साह के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरे हैं, जहां बड़ी संख्या में दर्शनार्थी पहुंच रहे हैं।
समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर में रमे ये प्राचीन मंदिर भगवान महावीर स्वामी से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक प्रमाणों के कारण विशेष धार्मिक पहचान रखते हैं, जिनकी महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है।
विशेष रूप से पावापुरी, बामनवाड़, नांदिया, अजारी और वीरवाड़ा जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थल इस अवधि के दौरान श्रद्धालुओं के आकर्षण और श्रद्धा का मुख्य केंद्र बने हुए हैं, जहां हर दिन भक्तों का तांता लगा रहता है।
नियमित धार्मिक अनुष्ठानों और वंदना के अलावा, इन ऐतिहासिक स्थलों पर पहुंचने वाले श्रद्धालु यहां की अनूठी और बेजोड़ स्थापत्य कला, प्राचीन प्रतिमाओं तथा ऐतिहासिक महत्व के अवशेषों का बारीकी से दर्शन कर रहे हैं।
इन मंदिरों के परिसरों में संचालित जीव रक्षा केंद्र जैन धर्म के मूल सिद्धांतों और जीवों के प्रति करुणा की भावना को जीवंत करते हुए श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
त्योहार के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रबंध समितियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं ने सुरक्षा, भोजन और आवास के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
पर्युषण पर्व के इन दिनों में सिरोही के ये प्राचीन तीर्थ न केवल धार्मिक साधना के केंद्र साबित हो रहे हैं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और समाज सेवा के अनूठे उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहे हैं।