📰 Kotputli News
Breaking News: एससीओ के मार्जिन पर भारत‑चीन ने एलएसी स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा पर किया महत्वपूर्ण संवाद
🕒 1 hour ago

शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति की शिखर सम्मेलन (एससीओ) के द्वितीय चरण के बीच, भारत और चीन के उच्चतम स्तर के प्रतिनिधियों ने लिंगा-एडमंड मिडलाइन (एलएसी) में स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गहन चर्चा की। यह चर्चा बोरिसोव, क़िर्गिस्तान के राजधानी में आयोजित हुई, जहाँ दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और रक्षा प्रमुखों ने आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए कई बिंदुओं पर बारीकियों से सहमति व्यक्त की। पहले पैराग्राफ में इस बैठक के मुख्य उद्देश्य को स्पष्ट किया गया। दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि एलएसी पर तनाव की स्थिति बगैर कारण नहीं बनी, बल्कि कम्युनिटी ऑफ़ सिक्योरिटी, आर्थिक सहयोग और सामाजिक संपर्क में असमानताएँ इस समस्या का मूल कारण हैं। भारत ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति व समरसता को बनाए रखने के लिए व्यापक रणनीति प्रस्तुत की, जिसमें सीमाओं पर सैन्य स्थापितियों का क्रमिक विघटन, नियमित सैन्य हॉटलाइन संचार और आपसी फ़ायरिंग एक्सरसाइज़ की योजना शामिल है। चीन ने भी अपनी स्थिति को दोहराते हुए कहा कि वे भी शांति को प्राथमिकता देते हैं और एलएसी में किसी भी आकस्मिक घातक घटना को रोकने हेतु तत्पर हैं। दूसरे पैराग्राफ में चर्चा के बड़े बिंदुओं को विस्तार से बताया गया। दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास और चिकित्सा सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। विशेष रूप से क़िर्गिस्तान के लिए एक संयुक्त आर्थिक परियोजना पर काम करने का निर्णय लिया गया, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे का विकास होगा। साथ ही, साइबर सुरक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने अपनी क्षमताओं को उजागर किया, जबकि चीन ने अंतरिक्ष और उपग्रह निगरानी में सहयोग की संभावना पर प्रकाश डाला। तीसरे पैराग्राफ में संवाद की संभावित चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर विचार किया गया। दोनों पक्षों ने माना कि अभी भी कई अनसुलझे मुद्दे मौजूद हैं, जैसे सीमा पर संसाधनों का वितरण, जल संसाधनों का साझा उपयोग और स्थानीय जनसंख्या की सुरक्षा। इन समस्याओं का समाधान करने के लिए नियमित उच्च स्तरीय बैठकें और विशेषज्ञ समूहों का गठन आवश्यक माना गया। एससीओ के मंच पर इस प्रकार की खुली बातचीत ने यह स्पष्ट किया कि भले ही भारत और चीन के बीच कई मौजूदा असहमतियाँ हों, परन्तु दोनों देशों की इच्छा इस बात का संकेत देती है कि वे शांति, स्थिरता और परस्पर लाभकारी सहयोग को प्राथमिकता देते हैं। अंत में निष्कर्ष के रूप में कहा गया कि एससीओ के साइडलाइन में हुई इस वार्ता ने न केवल एशिया‑पैसिफिक क्षेत्र में तनाव को कम करने का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत‑चीन संबंधों में एक सकारात्मक मोड़ भी स्थापित किया। यदि दोनों देश इस समझौते को ठोस कार्यों में बदलने में सफल होते हैं, तो न सिर्फ एलएसी बल्कि पूरे महाद्वीप में शांति और समृद्धि की नई लहर चलायी जा सकती है।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 30 Apr 2026