देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश में हुए चुनावी सर्वेक्षणों ने राजनीति के परिदृश्य को फिर से बदल दिया है। बांग्ला में भाजपा को बहुमत की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि तमिलनाडु में डीएमके+ गठबंधन ने बड़े हिस्से पर कब्ज़ा किया है। असभ में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत लगभग तय हो गई है, केरल में युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) वापसी की संभावना बन रही है, और पुदुचैरी में भी भाजपा की बहुस्तरीय जीत का संकेत मिलता है। इन सर्वेक्षणों को पाँच प्रमुख चार्टों में विभाजित किया गया है, जो प्रत्येक राज्य की स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। पहला चार्ट बांग्ला के चुनावी प्रतिफल को उजागर करता है। प्रमुख सर्वे के अनुसार, भाजपा को लगभग 48% समर्थन मिल रहा है, जबकि मौजूदा सत्ता में रहने वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का समर्थन 38% के करीब है। शेष वोट स्वतंत्र उम्मीदवार और छोटे गठबंधनों में बंटे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मदु दारोज़ की व्यक्तिगत आकर्षण और बंगाली पहचान के कारण टीएमसी को कुछ क्षेत्रों में फिर भी धारा मिल सकती है, परंतु कुल मिलाकर भाजपा की जीत की संभावना अधिक दिखती है। दूसरा चार्ट तमिलनाडु की स्थिति को रेखांकित करता है। यहाँ डीएमके+ गठबंधन को 45% से अधिक वोट मिल रहे हैं, जबकि भाजपा को 30% के आसपास समर्थन मिल रहा है। अंड्रप्रदेश के शरणाप्रकाश, कर्नाटक के कर्नाटक कांग्रेस और अन्य छोटे दलों का मिलीजुला समर्थन भी कांग्रेस को 20% तक पहुंचा रहा है। इस परिणाम से यह स्पष्ट होता है कि तमिलनाडु में सत्ता का दोगुना संघर्ष होगा, जहाँ ड्रमस्टिक-राजनीति और सामाजिक न्याय के मुद्दे प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। तीसरा चार्ट असभ को दर्शाता है, जहाँ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को 52% तक का समर्थन मिल रहा है। भाजपा के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी, बड़ी बहुजन पार्टी (बीडीपी) और अन्य स्थानीय दलों को मिलाकर भी इस प्रतिशत को पार करना कठिन दिख रहा है। चार्ट के अनुसार, असभ में मतदाता वर्गीकरण बहुत स्पष्ट है: ग्रामीण इलाकों में भाजपा को भारी समर्थन तथा शहरी क्षेत्रों में किंचित उलझन देखने को मिल रही है। चौथा चार्ट केरल पर केंद्रित है, जहाँ यूडीएफ को 42% समर्थन मिल रहा है, जिससे पिछले पाँच सालों में कांग्रेस-ऐतिहासिक रूप से संकेतित उलटफेर की आशा बढ़ रही है। विपक्षी एलडीएफ को 35% के आसपास वोट मिल रहे हैं, जबकि भाजपा को केवल 15% से कम समर्थन मिला है। केरल में सामाजिक न्याय, सामुदायिक समानता और विकास के मुद्दे ने मतदाता भावना को गहराई से प्रभावित किया है, जिससे यूडीएफ की पुनरागमन की राह तय हो रही है। पांचवां चार्ट पुदुचैरी को उजागर करता है, जहाँ एनडीए को 49% से अधिक का समर्थन मिल रहा है, जबकि कांग्रेस और डीएमके को मिलाकर भी यह आंकड़ा नहीं पहुंच पा रहा है। इस क्षेत्र में भाजपा की मजबूत प्रचार रणनीति, राष्ट्रीय मुद्दे पर केन्द्रित नारा और प्रमुख उम्मीदवार की लोकप्रियता ने वोट बैंकों को अपनी ओर मोड़ दिया है। सर्वेक्षण के अनुसार, छोटे दलों और स्वतंत्र उम्मीदवारों का प्रभाव सीमित है। इन सभी चार्टों के प्रकाश में यह स्पष्ट हो गया है कि 2026 के चुनावी परिदृश्य में राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का विस्तार और कई राज्य-स्तरीय गठबंधनों की चुनौती प्रमुख है। फिर भी, बांग्ला और केरल जैसे राज्यों में सामाजिक-आधारित पहचान और स्थानीय मुद्दों का प्रभाव गहरा है, जिससे अंतिम परिणाम में कुछ अनपेक्षित मोड़ों की संभावना बनी हुई है। राजनीति के प्रेमियों के लिए यह सर्वेक्षण एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो बताता है कि अगली मतदान प्रक्रिया में किस प्रकार की राजनीति और रणनीति काम करेगी।