बाग़ी जलते tensions के बीच, इरान ने अमेरिकी सरकार को एक नया पहल किया है, जिसमें हॉर्मुज की संकीर्ण जलमार्ग को फिर से खुला करने की पेशकश की गई है। यह प्रस्ताव अमेरिकी-इरानी संबंधों में एक संभावित मोड़ का संकेत देता है, जबकि इरान के प्रवक्ता अरग़ी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत के लिए मॉस्को का दौरा किया। इरान ने अपने तीन‑स्तरीय योजना में पहला कदम हॉर्मुज कोल को तत्कालीन रूप से खोलना रख लिया है, ताकि वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा न बने। दूसरा चरण अमेरिकी और इरानी रक्षा बलों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिये सीमित स्तर की सैन्य संवाद स्थापित करना है। तीसरा चरण, सबसे कठिन, परमाणु वार्ता को पुनः आरंभ करना और इरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को नियंत्रित करने के लिये एक सुरक्षित ढांचा तैयार करना है। इरानी अधिकारियों का कहना है कि यह प्रस्ताव यू.एस. के आर्थिक प्रतिबंधों के हटाने के साथ जुड़ा हो सकता है, जिससे दोनों देशों के लिए आर्थिक राहत के क्षितिज खुलेंगे। इस बीच, मॉस्को में पुतिन के साथ चर्चा के दौरान, इरान के वाणिज्य मंत्रि अरग़ी ने बताया कि रूस के सहयोग से तेल की निर्यात में वृद्धि और एशिया के प्रमुख बाजारों में पहुंच आसान होगी। पुतिन ने इस प्रस्ताव को "रणनीतिक स्थिरता" के रूप में सराहा और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने चाहिए। यूरोपीय देशों ने इस प्रस्ताव को सावधानीपूर्वक देख रहे हैं, क्योंकि हॉर्मुज को खोलना विश्व तेल कीमतों को स्थिर कर सकता है, जबकि इरान की परमाणु गतिविधियों पर घनिष्ठ नज़र रखी जाएगी। बाजारों ने भी इस समाचार पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। तेल की कीमतें गिरने के संकेत दिखाने लगीं, जबकि स्टॉक मार्केट में ऊर्जा संबंधित शेयरों में हल्की उछाल देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इरान और यू.एस. इस प्रस्ताव पर वास्तविक समझौता कर पाते हैं, तो मध्य पूर्व में एक लंबे समय के बाद शांति और आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि नयी वार्ता के लिए दोनों पक्षों को पारस्परिक विश्वास और पारदर्शिता स्थापित करनी होगी, ताकि भविष्य में कोई भी बर्बरता या तनाव वापस न आए। समग्र रूप से, इरान का यह नया सौदा प्रस्ताव एक संभावित कूटनीतिक ब्रेकथ्रू दर्शाता है, जिसमें हॉर्मुज को खुला रखने की स्वीकृति, आर्थिक प्रतिबंधों में कमी और परमाणु वार्ताओं का पुनः आरम्भ शामिल है। यदि सफल रहा, तो यह न केवल दो देशों के बीच नफ़रत को कम करेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता में बहुमूल्य योगदान देगा।