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Breaking News: आरएस सदस्य विक्रमजित साहनी ने की कुंडली‑कटास: केजरीवाल से हुई कठोर वार्ता, फिर दलील बना 7 एएपी सांसदों की शर्त
🕒 8 hours ago

राज्यसभा के अनुभवी सदस्य विक्रमजित साहनी ने हाल ही में दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल से हुई मुलाकात के बाद अपने विचारों को खुलकर व्यक्त किया। वह कहते हैं कि कई महीनों से एएपी सांसदों के एकजुट होने की इच्छा को लेकर निराशा बढ़ती जा रही थी। सिद्धान्त में एंपी को पार्टी से बाहर निकालना आसान था, परन्तु कार्यकुशलता और भीतर‑भीतर के दबावों ने इस कदम को जटिल बना दिया। इस कारण साहनी ने केजरीवाल को यह सूचना दी कि अगर सात सांसदों को हटाने के लिये स्पष्ट एवं न्यायसंगत प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, तो यह कदम पार्टी की ताकत को कमजोर कर सकता है। साहनी का मानना था कि इस निर्णय के पीछे की राजनीति केवल सत्ता में बने रहने की नहीं, बल्कि एएपी के मूल सिद्धान्तों को संरक्षित रखने की भी थी। केजरीवाल ने साहनी की बातों को गंभीरता से सुना और आगे चर्चा में यह स्पष्ट किया कि सात सांसदों के इस्तीफे से पार्टी की छवि को अपूरणीय नुकसान नहीं होगा, क्योंकि वही लोग जो अब भाजपा में प्रतिस्थापित हो रहे थे, पहले से ही पार्टी के भीतर असंतोष के कारण थे। सहयोगी सदस्यों ने भी इस बात को स्वीकार किया कि कई बार व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षा और पार्टी के प्रतिबद्धताओं के बीच टकराव हो जाता है, जिससे सदस्य पार्टी के मूलधर्म से दूर हो जाते हैं। इस दौरान, केजरीवाल ने पुष्टि की कि वह एएपी के आंतरिक लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के लिये एक विशेष समिति बनाकर इस मुद्दे को पारदर्शी रूप में सुलझाने का प्रस्ताव रखेंगे। साहनी ने यह भी बताया कि मुलाकात के दौरान केजरीवाल ने इस बिंदु को रेखांकित किया कि सात सांसदों के हटाने की प्रक्रिया में अनुशासनात्मक कार्यवाही और वैधानिक प्रावधानों का पालन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अगर इन संसदीय सदस्यों ने अपना मतभेद स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है तो उनके द्वारा वैधानिक रूप से राजनैतिक बदलाव करना ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। इस कारण, एएपी ने प्रतिवादी सांसदों के विरुद्ध एक औपचारिक याचिका राजसभा अध्यक्ष के पास प्रस्तुत की, जिसमें उन पर आधीशक्ति‑रहित अतिवाद के आरोप लगाए गए। अंत में, साहनी ने संक्षेप में कहा कि पार्टी को अब अपने मूल सिद्धांतों—समानता, सामाजिक न्याय और विकास—पर फिर से केंद्रित होना चाहिए। वह आशा व्यक्त करते हैं कि इस कदम से एएपी के भीतर की अनबन समाप्त होगी और पार्टी फिर से जनता के विश्वास के योग्य कार्य कर सकेगी। केजरीवाल के साथ हुई इस बातचीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक दल के भीतर विविध विचारों को सहनशक्ति के साथ संभालना आवश्यक है, ताकि भारतीय लोकतंत्र की ताकत बनी रहे।

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✍️ By Pradeep Yadav | 26 Apr 2026