रघव चड्ढा के राजसभा से इस्तीफा देने से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (AAP) को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रघव की इस कदम से कई सांसद भी अपनी सीट छोड़ने की संभावनाएँ बना रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस परिदृश्य में एंटी-डिफेक्शन कानून का लागू होना प्रश्नवाचक है, क्योंकि कई सांसदें अपने दल से अलग होकर भी वही सदस्यता रख सकते हैं। AAP को अब अपनी संगठनात्मक संरचना को फिर से सुदृढ़ करना पड़ेगा और राजनीतिक पुनर्संभवन की आवश्यकता है। इस बीच, प्रतिद्वंद्वी पार्टियां इस स्थिति का फायदा उठाकर पार्टी के दार्शनिक और चुनावी आधार को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।