पाकिस्तान के सैन्य कमांडर असीम मुनिर की उन्नति के पीछे दो बड़े संघर्षों का बड़ा हाथ है। पहला, अफगानिस्तान में 2001 के बाद के आतंकवाद‑विरोधी युद्ध में उन्हें रणनीतिक अनुभव मिला, जिससे उन्होंने करिवारी सैना में अपनी पकड़ मजबूत की। दूसरा, इराक‑इरान युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने इरान के साथ मध्यस्थता की कोशिश की, जिसमें मुनिर ने कूटनीतिक खेल में हिस्सा लिया। इस बीच भारत-ईरान संबंधों में बदलाव आया और पाकिस्तान को दोहरा खेल करने का आरोप लगा, जिससे मुनिर को दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाना पड़ा। इन जटिल स्थितियों में मुनिर ने सैन्य और कूटनीतिक दोनों क्षेत्रों में अपनी छवि को सुदृढ़ किया, जिससे वह पाकिस्तान के उच्चतम सैन्य पदों तक पहुंच पाए। इस प्रक्रिया में भारत और इरान दोनों की नीतियों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखा।