सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने साबरिमाला मंदिर के विवाद को आज के सातवें दिन सुनते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। झांसी के एक मूर्तिपूजक ने देवता को छूने के अधिकार को लेकर सवाल उठाया, जबकि कुछ जजों ने यह कहा कि धार्मिक प्रथा को आधुनिक युग में बदलना संभव है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अतीत की परम्पराओं को बरकरार रखने के लिए सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता है, परन्तु वह किसी को धर्म के आधार पर भेदभाव करने की अनुमति नहीं देता। इस बीच, कुछ न्यायाधीश ने कहा कि अविश्वासी व्यक्ति को धार्मिक रीति‑रिवाजों को चुनौती देने का कोई हक नहीं है। मामला अभी भी बहस में है और अगले चरण में निर्णय को अंतिम रूप दिया जाएगा।