मणिपुर में तीन साल पहले हुए जातीय झड़पों के बाद से स्थिति अस्थिर बनी हुई है। हाल ही में ट्रोंगलाोबी में विस्फोट के बाद जमीनी स्तर पर टॉर्च रैली हुई, जिसे सुरक्षा बलों के साथ झड़प में बदल दिया गया। कांग्रेस ने नई हत्याओं की जांच की मांग की और कानून व्यवस्था के ढहने की ओर इशारा किया। मेइती संगठनों ने भाजपा का बहिष्कार करने का फैसला किया, जबकि दलील दे रहे हैं कि सरकार ने इस हिंसा को संबोधित करने में पर्याप्त कदम नहीं उठाए। अयोध्या पार्टी ने प्रधानमंत्री पर मणिपुर में शांति स्थापित न करने का आरोप लगाया। इन सब घटनाओं से पता चलता है कि जातीय तनाव, राजनीतिक असंतोष और सुरक्षा विफलता मिलकर मणिपुर में लगातार उबाल बने रह रहे हैं।