📰 Kotputli News
Breaking News: कैलकत्ता हाई कोर्ट ने मांगी मतदाता मशीनों की जाँच, मांगा मंत्री सूवेंदु का जवाब – मतगणना विवाद पर नया मोड़
🕒 2 hours ago

कैलकत्ता के हाई कोर्ट ने आज मांता बनर्जी द्वारा सामने रखी चुनावी याचिका को स्वीकार किया, जिसमें उन्होंने सुनेनदु अधिकारी के खिलाफ छः नवंबर को आयोजित तालुका मतगणना के परिणाम को चुनौती दी थी। इस फैसले में न्यायाधीश ने पक्ष दोनों को कुल मिलाकर चार सौ पचास लाख रुपये मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और सिवीटीवी फुटेज को संरक्षित रखने का आदेश दिया। इस कदम से यह स्पष्ट हो गया कि न्यायालय चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर गंभीर है और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को रोकने के लिए सभी साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएंगे। याचिका में मांता बनर्जी ने कहा कि सुनेनदु अधिकारी ने मतदान के दौरान कई अनियमितताएँ अपनाई, जिससे मतदान की शुद्धता पर प्रश्न उठे। उन्होंने कहा कि एरिया में कई स्थानों पर मशीनों का दोबारा उपयोग, मतपत्रों का अनधिकृत परीक्षण और कई मतदान केंद्रों में मतगणना के दौरान गड़बड़ी देखी गई। इन आरोपों को सिद्ध करने के लिए अदालत ने सभी संबंधित ईवीएम, बॉक्स और सीसीटीवी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया, ताकि किसी भी समय इनका पुनरावलोकन किया जा सके। कोर्ट ने सुनेनदु अधिकारी को भी याचिका के जवाब में लिखित बयान देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि यदि कोई पक्ष इन आदेशों का उल्लंघन करता है, तो अदालत की अधिकारिता पर गंभीर सवाल उठेंगे। इसके अलावा, न्यायालय ने सभी पक्षों को बताया कि भविष्य में ऐसी ही मामलों में अदालत के आदेशों की अनदेखी करने पर सजा और जुर्माना दोनों हो सकता है। इस बीच प्रमुख राष्ट्रीय मीडिया ने भी कोर्ट के इस फैसले को चुनावी प्रक्रिया में नई पारदर्शिता के रूप में सराहा है। विरोधी दल के प्रवक्ता ने कहा कि यह निर्णय सुनेनदु अधिकारी के पक्ष में एक बड़ी जीत है, क्योंकि अब तक कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है जो मांता बनर्जी के आरोपों को सिद्ध कर सके। लेकिन दूसरी ओर, कई स्वतंत्र पर्यवेक्षक और नागरिक समूह इस बात पर अड़े हैं कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतें गंभीरता से ली जानी चाहिए। उनके अनुसार, केवल न्यायालय के आदेशों से ही मतदाता विश्वास को बहाल किया जा सकता है। निष्कर्षतः, इस निर्णय से यह स्पष्ट है कि न्यायिक प्रणाली चुनावी विवादों में निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देती है। अभी का चरण केवल नियमों का पालन करवाने का नहीं है, बल्कि मतगणना प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं को उजागर कर उन्हें सुधरने की दिशा में कदम बढ़ाने का भी है। यदि आगे के सुनवाइयों में मांता बनर्जी के आरोप सिद्ध होते हैं, तो सुनेनदु अधिकारी के जीत पर पुनर्विचार किया जा सकता है। इस बीच, दोनों पक्षों को कोर्ट के आदेशों का पूर्ण सम्मान करना होगा, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का भरोसा बना रहे।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 23 Jun 2026