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Breaking News: स्टैनफ़र्ड ग्रेजुएशन में सुनदार पिचाई को मिली विद्रोह की धक्का, छात्र निकले बेताब
🕒 1 day ago

स्टैनफ़र्ड विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित स्नातक समारोह में इस वर्ष एक अजीब मोड़ आया, जब गूगल के सीईओ सुनदार पिचाई को मंच पर बुलाया गया तो कुछ छात्र उनके उपदेश पर सात्विक टीका दे बैठे। अधिकारियों के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, पिचाई को नई पीढ़ी को प्रेरित करने और नवाचार के महत्व को समझाने के लिए आमंत्रित किया गया था। परन्तु जब उन्होंने अपनी शुरुआती टिप्पणी में बौद्धिक स्वातंत्र्य और एआई के सामाजिक प्रभावों को लेकर अपने विचार व्यक्त किए, तो स्टूडेंट्स का एक समूह तुरंत ही अंतर्विरोधी रूप से शोर मचा दिया। कई छात्रों ने जोर-शोर से तेज आवाज़ में बूमिंग की, जिससे मंच पर मौज‑मस्तिष्क का माहौल काफी असहज हो गया। बूमिंग के बाद कुछ छात्र एक साथ निकलकर परिसर के बाहर तक चल पड़े, यह दर्शाता है कि उनका निराशा केवल आवाज़ तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनका मूल वजह यह भी था कि वे महसूस करते थे कि पिचाई का भाषण उन्हें सीधे नहीं संबोधित कर रहा है। कई छात्रों ने कहा कि गूगल जैसी बड़ी संस्था के सीईओ को इस कदर छात्र अभिप्राय के प्रति अनभिज्ञ होना अस्वीकार्य है। कुछ ने सामाजिक न्याय, डेटा गोपनीयता और एआई तकनीकों के दुरुपयोग के मुद्दों को उठाते हुए कहा कि पिचाई का संदेश बहुत ही सहजश्री और धूम्रपट्टी जैसा है। इस पर प्रतिक्रिया में स्टैनफ़र्ड के प्रमुख ने छात्रों को शांत रहने और कार्यक्रम को सम्मानपूर्वक समाप्त करने का आग्रह किया, परन्तु कई छात्र अपने सिद्धान्तों पर अड़े रहे। सत्र के बाद मीडिया के पास उपलब्ध वीडियो में दिखाया गया है कि स्नातकों ने पिचाई के भाषण के दौरान तालियों की जगह तेज़ बूमिंग की और फिर साहसिक कदम उठाते हुए आउटडोर एरिया की ओर रवाना हो गये। इस घटना पर विभिन्न सामाजिक मंचों पर बहस छिड़ गई। कुछ लोग मानते हैं कि यह छात्र आंदोलन के सिद्धान्तों के पक्ष में है, जबकि अन्य ने इसे अनुशासनहीनता और सम्मान की कमी के रूप में निंदा की। इस बीच, गूगल के प्रतिनिधियों ने इस घटना को "अफसोसजनक" कहा और कहा कि उन्होंने हमेशा पारदर्शिता और जवाबदेही को महत्व दिया है, तथा भविष्य में इसी तरह के मंचों पर संवाद को अधिक खुला बनाने की इच्छा व्यक्त की। समापन में कहा जा सकता है कि इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि आज के छात्रों की आवाज़ें केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे सामाजिक, नैतिक और तकनीकी मुद्दों पर भी गहरी चर्चा करना चाहते हैं। स्नातक समारोह का उद्देश्य केवल औपचारिक विदाई नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा पर विचार-विमर्श का भी मंच बनना चाहिए। पिचाई की बातों ने इस बात को उजागर किया कि किस प्रकार बड़े कॉर्पोरेट नेताओं को युवा पीढ़ी की अपेक्षाओं और चिंताओं को समझना आवश्यक है। इस घटना से शिक्षा संस्थानों को भी यह सीख मिलती है कि वे अपने कार्यक्रमों में विविधता और संवाद को बढ़ावा देने के लिए अधिक सजग रहेंगे।

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✍️ By Pradeep Yadav | 15 Jun 2026