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Breaking News: टीएमसी पर फिर आई धक्के की लहर: विद्रोही रिताब्रत बानर्जी ने 64 विधायक समर्थन का दावा किया
🕒 1 hour ago

विस्तृत विश्लेषण: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस सप्ताह एक नई हलचल ने चर्चा के केंद्र में जगह बना ली है। तीनपाटी नेशनल फ्रंट (टीएमसी) के अंदर ही एक गंभीर बंटवारा उभर कर सामने आया है, जब पार्टी के प्रमुख विद्रोही नेता रिताब्रत बानर्जी ने सार्वजनिक तौर पर दावा किया कि वह 64 विधायकों का समर्थन प्राप्त कर चुका है। यह बयान न केवल टीएमसी के भीतर सत्ता संतुलन को बिगाड़ता है, बल्कि राज्य के राजनीति परिदृश्य को भी नया मोड़ दे सकता है। बानर्जी ने बताया कि ये 64 विधायक उनके साथ मिलकर सरकार में बदलाव लाने और कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन की दिशा में काम करना चाहते हैं। उनका यह दावा तब आया है, जब कांग्रेस के अध्यक्ष ममता बनर्जी और रहु के साथ संभावित मिलन की अटकलें तेज़ी से बढ़ रही थीं। वर्तमान स्थिति की गहरी जाँच करने पर पता चलता है कि बानर्जी का यह समर्थन दावा केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कई दस्तावेज़ और व्यक्तिगत मुलाक़ातों के आधार पर है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने इन विधायकों के नेतृत्व में एक वैकल्पिक नीति मंच तैयार किया है, जिसमें बेहतरी, रोजगार सृजन और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी गई है। इस दौरान कांग्रेस के बड़े नेताओं ने इस बात पर प्रतिक्रिया दी कि यदि टीएमसी में असंतोष है तो उन्हें कांग्रेस में स्वागत है, परन्तु उन्होंने इस दावे को पूरी तरह अस्वीकार भी कर दिया। विधायकों के इस बड़े समूह को जीतने का प्रयास टीएमसी के लिए गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है। यदि बानर्जी की टीम इन 64 दलों को सफलतापूर्वक अपने पक्ष में ला लेती है, तो यह न केवल टीएमसी के वर्तमान नेतृत्व को कमजोर करेगा, बल्कि राज्य के विधानसभा में गठबंधन सरकार के गठन को भी संभव बना सकता है। इस बीच, बिडेन ने अपने विकास कार्यों को जारी रखने का आश्वासन दिया, जिससे जनता के बीच इस राजनीतिक उलटफेर के प्रभाव को मापना कठिन हो रहा है। परिणामस्वरूप, राजनीतिक विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर विद्रोह से पार्टी के भीतर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। वर्तमान में टीएमसी के प्रमुख नेताओं ने इस स्थिति को शांत करने के लिए आंतरिक चर्चा और पुनर्स्थापना के उपायों पर काम करने का संकेत दिया है। हालांकि, बानर्जी के समर्थन दावे से यह स्पष्ट हो रहा है कि राज्य की राजनीति में नई धारा का उदय हो रहा है, जो आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अंत में, यह स्थिति दिखाती है कि राजनीति में कभी भी स्थिरता की गारंटी नहीं होती। रिताब्रत बानर्जी का 64 विधायक समर्थन का दावा, टीएमसी के लिए एक गंभीर चेतावनी और कांग्रेस के लिए संभावित अवसर दोनों को उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि पार्टी की आंतरिक शक्ति संरचना कैसे प्रतिक्रिया देती है और क्या यह आंदोलन अंततः एक नई गठबंधन सरकार के निर्माण में परिणत होता है या फिर मौजूदा शक्ति संतुलन को बनाए रखने के लिए कोई समझौता होता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 11 Jun 2026