दिल्ली के संसद भवन में त्रिनावली मोडल कांग्रेस (टीएमसी) के कई सांसदों का बेमेल झलकने लगा है, जब कालयन बेंद्रे ने खुलकर कहा कि कुछ बहिष्कृत टीएमसी सांसद बीजेडी की ओर झुक रहे हैं। यह बयान सख्त विरोधाभास और गठबंधन की संभावनाओं को उजागर करता है, जहाँ पार्टी के भीतर गुटबंदी ने राष्ट्रीय राजनीति को भी हिलाकर रख दिया है। कालयन बेंद्रे ने हाल ही में एक सार्वजनिक सभा में कहा कि "ट्रिनावली मोडल के कुछ विद्रोही सांसद अब भाजपा के ताल में झूम रहे हैं"। उनका यह बयान कई समाचार एजेंसियों द्वारा प्रकाशित हुआ, जिसमें बताया गया कि टीएमसी के भीतर कई सदस्य अपनी असंतुष्टियों को लेकर एकजुट हो रहे हैं और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के समर्थन की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। इस बीच, मानसी मुंडा, अदानी और अभिषेक बेंद्रे सहित कई प्रमुख नेता इस कदम को नकारते हुए पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया। एनडीटीवी के रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी के विद्रोही सदस्य "एनडीए के साथ गठबंधन" के पक्ष में हैं, परन्तु मौजूदा पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा इनके साथ गठबंधन नहीं करेगी। इस खुले संघर्ष में, कई सांसदों ने संधि के बारे में अनिश्चितता व्यक्त की और कहा कि वे "भाजपा के साथ मिलकर काम" करना चाहते हैं, परन्तु पार्टी के मुख्य नेतृत्व ने इसे "राजनीति का धूमिल तरीका" कहा। दूसरी ओर, टेलिग्राफ इंडिया ने बताया कि टीएमसी मुख्यालय में यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी के कुछ सांसद "सुवेंदु के हाजरी में चाय पर" अपनी असंतुष्टियों को व्यक्त कर रहे हैं। इस चाय की बैठक को लियाओन के रूप में वर्णित किया गया, जहाँ से यह स्पष्ट हुआ कि कुछ सांसद संकल्प ले रहे हैं कि वे पार्टी के भीतर से अलग हो जाएंगे और नई राजनीतिक दिशा अपनाएंगे। इनके बीच कई विद्रोही सांसदों ने राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर एक नई दिशा स्थापित करने की कोशिश की है, जिससे पार्टी के भीतर अराजकता पनप रही है। टीएएस के अनुसार, इस विवाद के बीच, टीएमसी के राष्ट्रीय प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बेंद्रे ने दिल्ली में इस मुद्दे को लेकर कई मुलाक़ातें कीं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि "टीएमसी की नींव में कोई भी धक्का नहीं दिया जायेगा" और पार्टी के भीतर के सभी विद्रोहियों को "धार्मिक उत्तरदायित्व" समझाते हुए पार्टी के मूल सिद्धांतों को दोहराया। इन बातों को देखते हुए, यह स्पष्ट हो रहा है कि टीएमसी के भीतर गहरी फूट और आंतरिक संघर्ष राजनैतिक परिदृश्य को नई दिशा देने वाले हैं। कालयन बेंद्रे का यह टिप्पणी पार्टी के भीतर चल रहे तनाव को और बढ़ाने के साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में भी एक नई लहर का संकेत देती है। क्या यह विद्रोह टीएमसी को कमजोर करेगा या फिर यह सत्ता की नई गठबंधन की ओर ले जाएगा, यह तो समय ही बताएगा।