राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NEET) का री‑टेस्ट 21 जून को आयोजित किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण परीक्षा में छात्रों की भविष्य की चिकित्सा शिक्षा सुरक्षित करने के लिए सरकार ने भारतीय वायुसेना (IAF) को प्रश्नपत्रों के परिवहन की जिम्मेदारी सौंप ली है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य है परीक्षा सामग्री की लीक से बचाव और चयनित अभ्यर्थियों के बीच निष्पक्षता बनाये रखना। इस व्यवस्था के तहत, वायुसेना के अनुभवी कर्मी, विशेष रूप से सुरक्षा दल, आधी रात से लेकर परीक्षा के अगले दिन सुबह तक प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रूप से एयरपोर्ट से परीक्षा केंद्र तक ले जाएंगे। वायुसेना द्वारा उठाए गए कड़े कदमों में कस्टमायर्ड कंटेनर, जीपीएस ट्रैकिंग और दो-स्तरीय पहचान प्रणाली शामिल हैं। प्रत्येक प्रश्नपत्र को एन्क्रिप्टेड बॉक्स में रख कर ट्रैक किया जाएगा और केवल अधिकृत अधिकारियों को ही उस पर पहुंच होगी। साथ ही, सभी बॉक्सों को विद्युत-चुंबकीय विकिरण से सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है जिससे कोई भी अनधिकृत परिवर्तन रोका जा सके। प्रश्नपत्रों की डिलीवरी से पहले, सभी सुरक्षा दल को विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें कूट‑भेद, चोरी‑रोकथाम तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया शामिल है। NEET‑UG 2026 री‑टेस्ट की तैयारी करने वाले छात्रों को यह जानकारी देनी आवश्यक है कि परीक्षा में किसी भी प्रकार का धोखाधड़ी या प्रश्नपत्र लीक की घटना नहीं होगी। परीक्षा केंद्रों पर भी अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था की गई है, जैसे सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा गार्ड और प्रवेश‑प्रस्थान नियंत्रण। परीक्षा के दिन, अभ्यर्थियों को अपने मूल दस्तावेज़ और पहचान प्रमाण पत्र साथ ले जाने होंगे, और प्रवेश द्वार पर बायो‑मेट्रिक स्कैनिंग की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य है कि सभी उम्मीदवारों को समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिले और परिणाम भरोसेमंद हो। सरकार ने इस कदम को लेकर बताया कि यह कदम केवल प्रश्नपत्रों की सुरक्षा नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को भी सुदृढ़ करता है। पिछले वर्षों में परीक्षा संबंधी कई शिकायतें और लीक की अफवाहें थी, जो अब इस सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल से समाप्त होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वायुसेना की भागीदारी से परीक्षा में विश्वास बढ़ेगा और छात्रों को मानसिक शांति मिलेगी। अंत में, सभी अभ्यर्थियों से अपील है कि वे परीक्षा के नियमों का पालन करें और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें, ताकि भविष्य में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त करने वाले योग्य डॉक्टरों का निर्माण हो सके।