जैसे ही भारत में बरसात के मौसम का पहला चक्र शुरू हुआ, दक्षिणी हिस्सों में निरंतर धूप और तपती हवा का सामना करने वाले लोगों को अचानक भारी वर्षा और तूफ़ानी तेज़ बूँदे मिलीं। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने विशेष रूप से अल्लोर, तिरुनेवल्ली, चेन्नई और कर्नाटक के कुछ भागों में 100 मिलीमीटर से अधिक की वर्षा की आशंका जताई है। यह असामान्य बवंडर अस्थायी रूप से अल्पकालिक बाढ़, जल स्त्रोतों में अचानक वृद्धि और कृषि क्षेत्रों में नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इस बीच, राष्ट्रीय स्तर पर एल नीनो की स्थिति जारी रहने के बावजूद, मौसमी हवा के चरण में बदलाव ने एक अप्रत्याशित मौसमीय परिदृश्य तैयार किया है। IMD ने मंगलवार को जारी किए गए विशेष चेतावनी में कहा कि इस हफ्ते के दौरान कोयंबटूर, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल के कई जिलों में लगातार तेज़ित बारिश और गड़गड़ा बारूद के साथ ठंडे बादल घूमेंगे। मौसम विभाग ने कहा कि बारिश के साथ ही गरज-चीज़, तेज़ हवाएं और कभी‑कभी तुफ़ानी बौछारें भी संभावित हैं, जिससे फसल, सड़क और बिजली वितरण प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा। विशेषकर कच्चे फसल वाले किसान, धातु एवं निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार, और यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को इस अचानक आने वाली बौछार के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। देश के उत्तरी भाग में, दिल्ली-एनसीआर में भी इस हफ्ते के अंत तक बारिश के संकेत मिले हैं। पिछले कई हफ़्तों तक लगातार गर्मी के कारण जल स्रोत घट रहे थे, लेकिन मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, जून के अंतिम दिनों में दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों में हल्की बौछार और ठंडे हवाओं का असर दिखेगा। यह परिवर्तन ना केवल जल आपूर्ति को संतुलित करेगा, बल्कि एथनालिन लैंगिक सूखा जैसे जोखिम को भी कम करेगा। भारी बारिश के कारण स्थानीय प्रशासन ने विभिन्न जिलों में जल निकासी के लिए अस्थायी जल‑धीरे‑भंवर तालाब और सीवेज़ साफ़ करने के आदेश जारी किए हैं। कई राज्यों में पहले ही आपातकालीन सेवाओं ने बाढ़ प्रभावी क्षेत्रों में बचाव कार्य शुरू कर दिया है, और लोगों को सुरक्षित ऊँचे स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। किसान संघों ने बताया कि बेअसर धान की फसलों को बचाने के लिए तुरंत निकासी और जल‑उपचार की जरूरत है, जबकि वन्यजीवन विभाग ने बाढ़ के कारण पहाड़ी इलाकों में मौसमी वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए विशेष ऑपरेशन शुरू किया है। निष्कर्षतः, जहाँ एल नीनो के कारण पूर्वी घाटी में कम बरसात की आशंका बनी थी, वहीं दक्षिण भारत को भारी वर्षा ने आश्चर्यचकित कर दिया है। मौसम विभाग ने इस असामान्य स्थिति को ‘मॉडर्न मोनसून’ के नाम से पुकारते हुए सतर्कता बढ़ाने का आह्वान किया है। नागरिकों को स्थानीय अद्यतन रिपोर्टों पर नजर रखने, आवश्यक उपाय करने और सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है, ताकि इस असामान्य मोनसून से होने वाले संभावित नुक़सान को न्यूनतम किया जा सके।