राष्ट्रपति के स्वीकृत आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC) के सदस्यों के साथ नई दिल्ली में आयोजित विशेष बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक विकास को पुनः गति देने के लिए कई ठोस कदमों की घोषणा की। यह बैठक केंद्र सरकार की मौजूदा नीति दिशा को परिष्कृत करने, विदेशी निवेश को आकर्षित करने और संरचनात्मक सुधारों को तेज़ करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को वर्तमान वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच स्थिरता, रोजगार सृजन और समावेशी विकास के तीन स्तंभों पर टिके रहना होगा। इस मंच पर विभिन्न उद्योगपतियों, वित्तीय विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए, जिससे चर्चा का दायरा व्यापक और गहन रहा। बैठक के प्रमुख बिंदुओं में सबसे पहले 'अधिक गति' की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई आर्थिक सुधार लागू किए जा चुके हैं, लेकिन उन्हें और तेज़ी से लागू करना आवश्यक है। इसके तहत डिजिटल अर्थव्यवस्था, कर सुधार, विनिर्माण क्षेत्र में निवेश प्रोत्साहन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियों को तुरंत लागू करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। साथ ही, विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नियामक ढाँचा सरल करने, भूमि उपयोग में सहजता लाने और विदेशी कंपनियों को आसान अनुमति प्रक्रिया प्रदान करने की घोषणा की गई। वित्त मंत्रियों और EAC के विशेषज्ञों ने बताया कि यदि इन पहलों को सही तरीके से लागू किया जाये तो अगले पाँच वर्षों में भारत को लगभग सत्तर अरब डॉलर तक के अतिरिक्त विदेशी पूंजी प्रवाह की उम्मीद है। इस राशि का बड़े हिस्से का उपयोग बुनियादी ढाँचे के विकास, स्वच्छ ऊर्जा, हाई‑टेक उद्योगों और स्वास्थ्य में निवेश के लिए किया जाएगा। इसके अलावा, रोजगार सृजन को बढ़ाने के लिए छोटे एवं मध्यम स्तर के उद्यमों (एसएमई) को विशेष ऋण और तकनीकी समर्थन प्रदान किया जाएगा, जिससे ग्रामीण और अभावग्रस्त क्षेत्रों में आर्थिक अवसरों की गिनती बढ़ेगी। बैठक के निष्कर्ष स्वरूप, प्रधानमंत्री ने सभी सदस्यों को एकत्रित रूप से कार्य करने, नीतियों को समय से पहले लागू करने और निरंतर निगरानी के लिए एक कार्यदल स्थापित करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, आर्थिक सुधारों की प्रगति को मापने के लिए एक टच‑पॉइंट प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे सरकार को वास्तविक समय में डेटा उपलब्ध होगा। इस दिशा में सरकार की दृढ़ संकल्पना यह दर्शाती है कि भारत न केवल आर्थिक स्थिरता बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में भी अग्रणी बनना चाहता है। अंततः, सभी उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पहल की सफलता के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में सहयोग करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की, जिससे देश की आर्थिक गति में इजाफा और जनता के जीवन स्तर में सुधार की आशा स्पष्ट हुई।