संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सत्र में भारत ने पाकिस्तान पर तानाशाह‑सम्प्रदायिक रुख का आरोप लगा दिया, यह कहते हुए कि इस महत्त्वपूर्ण मंच को किसी भी पक्ष की पक्षपाती और झूठी कथाओं के प्रचार‑प्रसार के लिए नहीं, बल्कि विश्व शांति और सुरक्षा के संरक्षण हेतु प्रयोग किया जाना चाहिए। भारत के प्रवक्ता ने कहा कि UNSC का सदस्य होना एक बड़ी जिम्मेदारी है, न कि निरर्थक वाद‑विवाद और झूठे आरोपों का मंच। इस सन्देश के साथ भारत ने विशेष रूप से पाकिस्तान द्वारा कश्मीर पर उठाए गए इस बयान को "अवांछित" और "भ्रामक" घोषित किया, जिससे दोनों देशों के बीच पहले ही तनावपूर्ण संबंध और भी तीव्र हो गए। भारत ने इस अवसर पर याद दिलाते हुए कहा कि कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है और रहेगा; यह न सिर्फ ऐतिहासिक मान्यता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र के संकल्पों में भी स्पष्ट रूप से दर्ज है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान का कश्मीर को लेकर निरंतर समर्थन और उसके खिलाफ कथित "जनसंहार" के आरोप, अवैध रूप से बेइमान हैं और उनका कोई ठोस तथ्य नहीं है। इस प्रकार के निराधार बयान केवल ईंधन की तरह काम करते हैं, जिससे शांति‑स्थापना के प्रयासों को बाधा मिलती है और सुरक्षा परिषद के कामकाज में बाधा उत्पन्न होती है। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने पिछले हफ्तों में कश्मीर की स्थिति को लेकर कई बार विषाक्त बयान दिए थे, जिसमें उसने भारत के नियंत्रण में रहने वाले क्षेत्रों को "अवैध कब्जा" कहा था। इन आरोपों को भारत ने पूरी तरह अस्वीकार कर दिया और कहा कि यह केवल अपने पक्ष को बढ़ावा देने के लिये अंतरराष्ट्रीय मंच का दुरुपयोग है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि कश्मीर के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कई बार भारत को समर्थन दिया है, और इस मुद्दे में किसी भी एकतरफा निर्णय का समर्थन नहीं किया जायेगा। UNSC के मंच पर इस बहस ने यह स्पष्ट कर दिया कि सदस्य देशों की जिम्मेदारी केवल भाषण देने की नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर स्पष्ट, संतुलित और निष्पक्ष दिशा-निर्देश पेश करने की भी है। भारत ने इस सत्र में यह संदेश देने का प्रयास किया कि यदि कोई भी देश इस मंच को अपने राजनीतिक लाभ के लिये उपयोग करता है, तो उसकी विश्वसनीयता ह्रास पाती है और वह मनुष्य के भरोसे के काबिल नहीं रह पाता। निष्कर्षतः, इस तेज़ी से बढ़ते तनाव में दोनों देशों को अपने-अपने रुख में सापेक्षिक समझ और संवाद की आवश्यकता है। भारत ने फिर से कहा कि कश्मीर मुद्दे पर कोई भी निर्णय तभी मान्य होगा जब वह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के अनुरूप हो। इस संदर्भ में, UNSC को अपने मूल उद्देश्य, अर्थात् शांति और सुरक्षा की रक्षा, को पूरी दृढ़ता से साकार करना चाहिए, न कि झूठी और पक्षपाती कथाओं के मंच में बदलना चाहिए।