राष्ट्रीय विद्यालय परीक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने हाल ही में दिल्ली पुलिस के पास एक विस्तृत शिकायत दर्ज करवाई है, जिसमें बोर्ड की परिणाम-परिणाम पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर लगातार हुए साइबर हमले का उल्लेख है। बोर्ड ने बताया कि पिछले तीन दिनों में कई समानांतर हमले हुए, जिनमें लगभग तीन मिलियन चार सौ मिलियन दुर्भावनापूर्ण डेटा पैकेट्स का ट्रैफ़िक देखा गया। इस साइबर हमले ने छात्रों को उनके उत्तर पत्रिकाएँ, परिणाम और पुनर्मूल्यांकन की जानकारी तक पहुँचने में बाधा उत्पन्न कर दी, जिससे शैक्षणिक प्रक्रिया में बड़ी दिक्कत आई। सीबीएसई ने बताया कि इन हमलों का मकसद बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल को बाधित करना, संवेदनशील छात्र डेटा चोरी करना और परीक्षा परिणामों को प्रभावित करना था। इस वर्ष के दसवीं और बारहवीं कक्षा के परिणामों के रिलीज़ के समय पर ये हमले हुए, जिससे बड़ी संख्या में छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों में असहजता बनी। कई छात्र पोर्टल पर लॉगइन नहीं कर पा रहे थे, जबकि कुछ ने तो उत्तर पत्रिकाओं की फोटो कॉपी तक नहीं मिल पाई। इस स्थिति को देखते हुए बोर्ड ने तुरंत तकनीकी सुरक्षा टीम को बुलाया और साथ ही दिल्ली पुलिस में साइबर अपराध शाखा को FIR दायर कराई। दिखाए गए आंकड़ों के अनुसार, हमला करने वाले समूह ने बॉटनेट का उपयोग करके बड़ी मात्रा में पैकेट्स को पोर्टल के सर्वर तक भेजा, जिससे सर्वर ओवरलोड हो गया। सीबीएसई ने कहा कि उनके आईटी विभाग ने तुरंत फ्रेमवर्क को मजबूत किया, फायरवॉल और इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम को अपडेट किया और अटैक को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय लागू किए। साथ ही, बोर्ड ने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित है और परिणामों में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया। आरोपी समूह के स्क्रिप्ट और IP एड्रेस की पहचान के लिए अब दिल्ली पुलिस तकनीकी विश्लेषण कर रही है। इस बीच, बोर्ड ने सभी छात्रों को पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर उपलब्ध नई सुविधाओं का उपयोग करने की सलाह दी, तथा तकनीकी कठिनाइयों के कारण हुए तनाव के लिए माफी माँगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के बड़े पैमाने के साइबर हमले शिक्षा क्षेत्र में भी बढ़ती खतरे की ओर इशारा करते हैं, और सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म को सतत सुरक्षा अपडेट और मॉनिटरिंग की आवश्यकता है। निष्कर्षतः, सीबीएसई द्वारा पुलिस में की गई शिकायत और तत्काल तकनीकी कदमों ने यह साबित किया कि परेशानियों के सामने बोर्ड ने सक्रिय रवैया अपनाया है। हालांकि छात्र और अभिभावकों को इस तरह की अटैक से बचाने के लिए भविष्य में अधिक सुदृढ़ साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करना आवश्यक होगा। यह घटना सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक चेतावनी है कि डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को निरंतर सुरक्षा अपडेट और जागरूकता के साथ बनाए रखना चाहिए, ताकि छात्रों के अधिकार और शैक्षणिक प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।