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Breaking News: कार्यान्वयन में अनसुना बिड़ा: कर्नाटक के मंत्री रामलिंगराजी रेड्डी ने पदत्याग का ऐलान किया
🕒 1 day ago

कर्नाटक राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण को एक बार फिर तीव्रता मिली, जब जलवायु परिवर्तन और शहरी विकास विभाग के पोटफोलियो को लेकर असंतोष में बहाल मंत्री रामलिंगराजी रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह कदम उनके "हीन-भूषा" महसूस करने के अनुभव के बाद आया, जिसका उल्लेख उन्होंने अपने इस्तीफे के पत्र में किया। लाल बत्ती के बाद, मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार ने इस अप्रत्याशित घटना पर "सर्वोच्च उपाय किए जाएँगे" कहा, जबकि विपक्षी दल इस असंतोष की गंभीरता को उजागर कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस इस्तीफे के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, मंत्री को गुजरात में ग्रामीण जल संरक्षण के प्रमुख प्रोजेक्ट के तहत अंचल नियोजन की जिम्मेदारी से हटाया जाना, जबकि उनके दो मित्रीय सदस्यों को इस क्षेत्र में प्रमुख पद सौंपे गये। दूसरा, बंगलोर के शहरी विकास विभाग को किसी भी उम्मीदवार को सौंपी असाइनमेंट के बजाय, प्रधान मंत्री के विशेष सलाहकार को इस पोर्टफोलियो पर नियंत्रण देना। इससे मंत्री को यह महसूस हुआ कि उनका सम्मान और अधिकार ह्रासित हो रहा है। दूसरी ओर, शरण आर्यन और उनके सहयोगियों ने इस इस्तीफे को एक "बिना वजह के विद्रोह" कहा, यह मानते हुए कि यह राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिससे शिवाकुमार सरकार को एकजुट रखने की कोशिश की जा रही है। विभिन्न राजनैतिक दलों ने इस घटना को "कर्नाटक की सरकार में विश्वास की कमी" के रूप में वर्णित किया और तुरंत एक उच्च स्तरीय समिति बनाकर इस मुद्दे की जाँच करने का प्रस्ताव रखा। निष्कर्षतः, रामलिंगराजी रेड्डी का पदत्याग कर्नाटक की राजनीति में एक नया मील पत्थर बन गया है। यह न केवल मंत्री की व्यक्तिगत असंतोष को दर्शाता है, बल्कि सरकार की नीति निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और समावेशिता की जरूरत को भी उजागर करता है। आगामी कुछ हफ्तों में इस मुद्दे पर उठाए जाने वाले कदम, कर्नाटक की राजनैतिक स्थिरता और जनता के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करेंगे।

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✍️ By Pradeep Yadav | 05 Jun 2026