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Breaking News: केरळ में सरकार में दरार: मंत्री का असंतोष, पोर्टफ़ोलियो से असंतुष्ट, इस्तीफ़ा संभव
🕒 2 days ago

केरळ की राजनीति में मौजुदा सरकार को एक बड़ी हलचल का सामना करना पड़ रहा है। डॉ. डी.के. शिवाकुमार के मुखिया बने कर्नाटक सरकार में कई पोर्टफ़ोलियो का पुनर्विभाजन हुआ, जिससे कई वरिष्ठ मंत्री असंतुष्ट दिखे। इनमें सबसे प्रमुख नाम है आर. रामालिंगा रेड्डी, जो हाल ही में अपने पोर्टफ़ोलियो को लेकर शिकायत करते हुए इस्तीफ़ा देने की संभावना जाहिर कर चुके हैं। इस परिवर्तन की वजह से सरकार के भीतर सत्ता का संतुलन बिगड़ रहा है और इस पर विपक्ष तथा राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें टिकी हुई हैं। आर. रामालिंगा रेड्डी ने आत्मा-विश्वास के साथ कहा कि उन्हें लगातार अपमानित किया गया है और पार्टी की आंतरिक राजनीति में उनका स्थान कमजोर हो गया है। वह अपने वर्तमान सौंपे गये पोर्टफ़ोलियो को "उदासीन" तथा "अधूरी जिम्मेदारी" बताते हुए, यह भी संकेत दिया कि इस तरह के बंटवारे में उनका कोई सम्मान नहीं बचा। इसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा देने की कार्रवाई शुरू कर ली, जिससे केआरएस (कर्नाटक राजस्व विभाग) और अन्य मंत्रालयों के कार्यों पर असर पड़ सकता है। लालसावान और आशंकित राजनेता यह भी मानते हैं कि यह कदम सरकार को भीतर से कमजोर कर सकता है, तथा विपक्ष इस अवसर का फायदा उठाकर शासक दल पर सवाल उठाने की कोशिश करेगा। शिवाकुमार सरकार ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है, परन्तु कहा गया कि सभी मंत्रियों को उनके कार्यस्थल पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की अपेक्षा है। कई राजनैतिक टिप्पणीकारों ने कहा कि सरकार को इस तरह के विवाद को जल्दी सुलझाकर, एक संतुलित पोर्टफ़ोलियो वितरण करना चाहिए, जिससे प्रत्येक मंत्री को उनकी क्षमताओं के अनुसार जिम्मेदारी मिल सके। आँकड़े दिखाते हैं कि यदि इस संघर्ष को समय पर नहीं सुलझाया गया तो राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी, और जनता का भरोसा भी टूट सकता है। विरोधी दल ने इस मामले को लेकर गहरी चिंता जताई है और उन्होंने सरकार से मांग की है कि सभी मंत्रियों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पोर्टफ़ोलियो आवंटित किया जाए। यह स्पष्ट है कि इस प्रकार का घर्षण केवल केर्नाटक में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सरकार की छवि पर असर डाल सकता है। अंततः, इस संघर्ष का समाधान इस बात पर निर्भर करेगा कि केर्नाटक की सरकार इस मुद्दे को कितनी शीघ्रता और ईमानदारी से संभालती है, और क्या वह अपने मंत्रियों को संतुष्ट कर सकती है, जिससे सरकार की स्थिरता बनी रहे।

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✍️ By Pradeep Yadav | 05 Jun 2026