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Breaking News: आरबीआई ने रिपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा: महंगाई पर कड़ी नजर, नीति में निरपेक्षता बनी रहेगी
🕒 2 days ago

वित्तीय बाजारों में आज बड़ी उत्सुकता के साथ आरबीआई के मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का इंतजार किया जा रहा था। पश्चिम एशिया में तनाव और तेल की कीमतों में छलांग के बीच, इस बार समिति ने अपनी प्रमुख नीति दर—रिपो दर—को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। इस निर्णय के साथ, दो लगातार बैठकें होने के बाद भी दर में कोई बदलाव नहीं हुआ, जिससे बाजार में स्थिरता की आशा बनी रही। समिति ने इस कदम को मौद्रिक नीति की निरपेक्ष स्थिति को जारी रखने के रूप में बताया, जिससे आर्थिक विकास को समर्थन मिलते हुए महंगाई को नियंत्रित किया जा सके। बैठक में आरबीआई के प्रमुख, सुश्री संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में कई अनिश्चितताएँ मौजूद हैं। पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष से वैश्विक तेल की कीमतों में तेज़ी आती रह सकती है, जो सीधे तौर पर भारत की आयात लागत को बढ़ाएगी और महंगाई पर दबाव डाल सकती है। इस कारण नीति आयोग ने महंगाई के लक्ष्यों को देखते हुए दर में कोई बदलाव नहीं करने को उचित माना। साथ ही, मौसमी मानसून की कमी और कृषि उत्पादन में संभावित गिरावट को लेकर भी सतर्कता बनी हुई है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल का डर बना रहता है। मुद्रा नीति समिति ने इस बैठक में प्रमुख आर्थिक संकेतकों की पुनः जाँच की और महंगाई के पूर्वानुमान को 5.1 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। यह संकेत देता है कि आगे भी महंगाई के दबाव को कम करने के लिए सतर्कता बरती जाएगी। हालांकि, ऋण लेने की दर में स्थिरता को देखते हुए, उपभोक्ताओं और व्यावसायिक इकाइयों को वर्तमान ब्याज दरों पर लाभ मिल सकता है, जिससे निवेश और खर्च में हल्का सुधार देखने को मिल सकता है। नीति आयोग ने यह भी कहा कि भविष्य में यदि महंगाई में गिरावट नहीं आती और तेल की कीमतों में पुनः उछाल होता है, तो दर में परिवर्तन की संभावना को नहीं खारिज किया जा सकता। आर्थिक विशेषज्ञों ने इस निर्णय को दो पहलुओं से देखा है। एक ओर, निरपेक्ष नीति का अर्थ है कि सरकार आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच स्थिरता को महत्व देती है, जिससे निवेशकों का भरोसा बना रहे। दूसरी ओर, कुछ विश्लेषकों ने कहा कि अगर महंगाई की लहर आगे बढ़ती रही तो दर को भारी बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है, जो आर्थिक विकास को ठेस पहुंचा सकती है। अभी के लिए, बाजार में इस निरपेक्ष दृष्टिकोण को सकारात्मक माना जा रहा है, और यह आशा की जा रही है कि आगामी महीनों में महंगाई में गिरावट के संकेत मिलने पर नीति को पुनः मूल्यांकन किया जाएगा। निष्कर्षतः, आरबीआई ने मौद्रिक नीति की निरपेक्षता को बनाए रखते हुए रिपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा, जिससे आर्थिक स्थिरता और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलन बनाकर रखा गया। पश्चिम एशिया के संघर्ष, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मानसून की अनिश्चितताओं को देखते हुए, नीति निर्माताओं ने सतर्क रहने का संकल्प जताया है। आगामी महीनों में महंगाई के आंकड़े और वैश्विक ऊर्जा मूल्य परिवर्तन इस नीति दिशा को पुनः आकार दे सकते हैं, लेकिन फिलहाल यह निर्णय बाजार में सकारात्मक आशावाद को बढ़ावा देता दिख रहा है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 05 Jun 2026