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Breaking News: सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर 50 छात्रों के अनधिकृत हमला से सुरक्षा में खामी उजागर
🕒 6 days ago

सीबीएसई के ऑनलाइन पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर हाल ही में हुए एक बड़े साइबर हमले ने भारत के शैक्षणिक प्रणाली की सुरक्षा में glaring खामियों को उजागर किया है। इन सौजन्य से नहीं किया गया, बल्कि लगभग पचास छात्रों के एक समूह द्वारा किया गया यह अनधिकृत प्रवेश, पोर्टल के डेटा को जोखिम में डालने के साथ-साथ छात्रों के अंक सुधार प्रक्रिया की विश्वसनीयता को भी धूमिल कर गया। इस घटना ने शैक्षणिक संस्थानों को डिजिटल सुरक्षा के महत्व पर फिर से सवाल उठाने पर मजबूर किया है। हैक्स की विस्तृत जांच से पता चला कि इस हमले के पीछे छात्रों ने वैध लॉगिन जानकारी को चोरी करके और विशेष इंट्रूज़न टूल्स का प्रयोग कर पोर्टल की सुरक्षा प्रणाली को बाईपास किया। परिणामस्वरूप, वे बिना अनुमति के उत्तरपत्रों तक पहुँचे और संभावित रूप से अंक बदलने की कोशिश की। इस कुख्यात घटना के बाद सीबीएसई ने तुरंत पोर्टल को बंद कर दिया और सभी उपयोगकर्ताओं को पासवर्ड रीसेट करने का निर्देश दिया। साथ ही, अधिकारियों ने बताया कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि दो बार पोर्टल हैक होने के बाद की तृतीय उल्लंघन है, जिससे सिस्टम में मौजूदा सुरक्षा खामियों की गंभीरता स्पष्ट हुई। इस हमले से जुड़े कई मुद्दे शिक्षा क्षेत्र के लिए चेतावनी स्वरूप हैं। पहला, ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली में पूर्णतया एन्क्रिप्शन और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन की अनिवार्यता पर बल देना चाहिए। दूसरा, छात्रों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना आवश्यक है, क्योंकि उनका कोई हिस्सा भी यदि अनवेदनशीलता का शिकार हो तो पूरे प्रणाली को जोखिम में डाल सकता है। तीसरा, भविष्य में ऐसे हमलों से बचने के लिये स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट और नियमित पैठ परीक्षण (पेन-टेस्ट) को अनिवार्य किया जाना चाहिए। इन घटनाओं के प्रकाश में सीबीएसई ने अपने पोर्टल में सुधार करने का संकल्प जताया है। उन्होंने अगले साल से सभी मूल्यांकन उत्तर पत्रों को डिजिटल लॉकर (डिजी लॉक़र) के माध्यम से छात्रों को उपलब्ध कराने की योजना घोषित की है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और डेटा की सुरक्षा भी सुदृढ़ होगी। साथ ही, सुरक्षा में अंतराल को बंद करने के लिये एक विशेष तकनीकी टीम गठित की गई है, जो लगातार सॉफ़्टवेयर अपडेट और त्रुटि सुधार पर काम करेगी। यह कदम न केवल विद्यार्थियों के विश्वास को बहाल करेगा, बल्कि शिक्षा तकनीकी के क्षेत्र में भारत को नई दिशा भी देगा। अंत में कहा जा सकता है कि इस प्रकार का ‘मैलिशियस अटैक’ न केवल तकनीकी लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि छात्रों, अभिभावकों और शैक्षणिक प्राधिकारियों के बीच भरोसे की दूरी को भी दिखाता है। डिजिटल युग में शिक्षा प्रणाली को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना अत्यावश्यक है। सीबीएसई द्वारा उठाए कदम यदि सटीक और समय पर लागू किए जाएँ तो भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सकता है और छात्रों की शैक्षणिक यात्रा को सुरक्षित किया जा सकता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 31 May 2026