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Breaking News: पेंटाॅन ने चीन की सैन्य तेज़ी पर लगाई चेतावनी, साथियों से किया रक्षा खर्च बढ़ाने का आह्वान
🕒 9 hours ago

अमेरिकी रक्षा विभाग के प्रमुख ने हाल ही में शैंग्री-ला डायलॉग में चीन की तेज़ी से बढ़ती सैन्य शक्ति को लेकर गहरी चिंता जताई और अपने सहयोगियों को संरक्षण खर्च में वृद्धि करने का आग्रह किया। पेंटाॅन के इस बयान ने विश्व मंच पर सुरक्षा माहौल को फिर से तड़क-तड़क कर दिया है। चीन ने पिछले कुछ वर्षों में अपने रक्षा बजट को तेज़ गति से बढ़ाया है, नई तकनीकी हथियार प्रणाली और अत्याधुनिक विमानन क्षमताओं में भारी निवेश किया है। इस रणनीतिक बदलाव को देखते हुए, अमेरिकी प्रधान ने कहा कि यह केवल एक क्षेत्रीय चुनौती नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए बड़ा जोखिम है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अगर हम अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत नहीं करेंगे, तो भविष्य में असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।" दूसरी ओर, यूरोपीय सहयोगियों और एशिया‑पैसिफिक क्षेत्र के कई देशों ने भी इस चेतावनी को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि वे अब अपने राष्ट्रीय रक्षा बजट को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, ताकि अपनी सीमाओं की सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता को सुनिश्चित किया जा सके। कई देशों ने अपने रक्षा कार्यक्रमों में नई तकनीकी निवेश, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष रक्षा को प्रमुखता दी है। इसके साथ ही, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने सहयोगियों से अपेक्षा की है कि वे संयुक्त रूप से मिलकर चीन की सैन्य गतिविधियों को संतुलित करने के लिए सामूहिक रक्षा बुनियादी ढांचा तैयार करें। यह बयान विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मंचित किया गया, जहाँ सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सहयोगी देशों को अपने मिलिट्री खर्च को कम से कम जीडीपी के दो प्रतिशत तक ले जाना चाहिए। शैंग्री-ला डायलॉग के दौरान इस मुद्दे पर कई प्रमुख नेताओं ने अपने-अपने देशों की रणनीतियों को उजागर किया। जर्मनी के रक्षा मुख्य अधिकारी ने कहा कि चीन को इस संवाद में शामिल न होना एक बड़ी चूक है और यह क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर कर सकता है। ब्रिटेन, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी अमेरिकी पक्ष से मजबूत सहयोग के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी साझेदार मिलकर प्रतिबंधात्मक उपाय अपनाते हैं और रक्षा खर्च को बढ़ाते हैं, तो चीन को अपनी तेज़ी को धीरे-धीरे सीमित करने पर मजबूर किया जा सकता है। समाप्ति में, पेंटाॅन के इस सतर्कता संकेत ने विश्व सुरक्षा के भविष्य को नया मोड़ दिया है। यह स्पष्ट है कि अब सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि ठोस वित्तीय और रणनीतिक कदमों में परिवर्तन आवश्यक है। यदि सहयोगी राष्ट्र अपने रक्षा खर्च को बढ़ाते हुए साझा चुनौतियों का सामना करेंगे, तो चीन की सैन्य तेज़ी को संतुलित करना संभव हो सकेगा। इस दिशा में आगे की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपेक्षा की जा रही है, ताकि वैश्विक शांति और सुरक्षा को बनाए रखा जा सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 30 May 2026