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Breaking News: इएल नीनो की संभावित बौछार: मानसून में टेढ़ी‑मेढ़ी बारिश, सितंबर तक बना रह सकता है
🕒 22 hours ago

देश के प्रमुख मौसम विभाग के प्रमुख ने कहा है कि इस साल गर्मियों के बाद इएल नीनो की लहर भारत के ऊपर आकर मानसून के दौरान वर्षा को काफी प्रभावित कर सकती है। इएल नीनो, जो कि प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान में अनुचित वृद्धि से उत्पन्न होती है, आम तौर पर भारत में कम वर्षा का कारण बनती है। इस बार का इएल नीनो सत्र विशेषकर दक्षिणी, मध्य एवं पश्चिमी भारत में बरसात को घटा सकता है और इसका प्रभाव सितंबर तक बना रह सकता है, जब तक कि इस घटनाक्रम का प्रभाव धीरे‑धीरे कम नहीं हो जाता। इस चेतावनी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मौसमी कृषि, जल भण्डारण और बाढ़‑प्रबंधन से जुड़ी कई नीतियों को इस पर पुनर्विचार करने की जरूरत पड़ सकती है। इएल नीनो के कारण वर्षा की संभावना को लेकर मौसम विज्ञानियों ने पहले ही 60 प्रतिशत संभावना जताई है कि इस साल की मानसून सामान्य से कम होगी। भारतीय मौसम विभाग ने इस बात को दोहराते हुए कहा कि पहले अनुमानित दो-तीन सेंटीमीटर मानक वर्षा से काफी कम हो सकता है, जिससे कई कृषि उत्पादकों को वर्षा‑निर्भर फसलें उगाने में कठिनाई हो सकती है। साथ ही, देश के विभिन्न हिस्सों में तापमान में गिरावट देखी गई है, जबकि निचले स्तर पर बरसात की संभावना घट रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन बदलावों से जल की उपलब्धता, जलाशयों के जल स्तर और नदियों के प्रवाह पर भी असर पड़ेगा, जिससे जलजनित आपदाओं का जोखिम बढ़ सकता है। कृषक एवं ग्रामीण इलाकों में इस स्थिति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय बीज भंडार की स्थापना की घोषणा की है। 1.74 लाख क्विंटल बीजों की यह स्टॉक स्थिति भविष्य में फसल विफलता के जोखिम को कम करने के लिये तैयार किया गया है, जिससे बीज की कमी न हो और किसानों को वैकल्पिक बीज विकल्प मिल सके। इसके अतिरिक्त, जलसंकट को कम करने के लिये जलसंधारण, जल पुनर्चक्रण व तालाब निर्माण जैसी जल संरक्षण योजनाओं को तेज़ी से लागू किया जा रहा है। आगे चलकर मौसम विभाग ने कहा है कि इएल नीनो की लहर के प्रभाव को सीमित करने के लिये समय-समय पर मौसम पूर्वानुमानों को अद्यतन किया जाएगा और विशेष क्षेत्रों के लिये आपातकालीन योजना तैयार की जाएगी। इस दौरान किसान, जल प्रबंधक एवं नीति निर्माताओं को संयुक्त रूप से कार्य करना होगा, ताकि अनिश्चित मौसमीय माहौल में भी कृषि उत्पादन और जल सुरक्षा को बनाए रखा जा सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 30 May 2026