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Breaking News: असम विधानसभा ने यूसीसी विधेयक को आवाज़-मत से पारित किया, विपक्ष का है तीखा विरोध
🕒 2 weeks ago

असम विधानसभा ने इस सप्ताह एक विरोधाभासी कदम उठाते हुए यूनीफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल को आवाज़-मत से पारित कर दिया। यह विधेयक, जिसका उद्देश्य धार्मिक समुदायों के बीच समान वैवाहिक और सामाजिक नियम स्थापित करना है, को कई विपक्षी दलों ने अनावश्यक और असंवैधानिक बताया। विधेयक को आवाज़-मत से पास करने का कारण सरकार ने बताया कि यह प्रक्रिया तेज़ी से महत्वपूर्ण सुधारों को लागू करने के लिए थी, जबकि विपक्ष ने इसका प्रयोग लोकतांत्रिक बहस को समाप्त करने के आह्वान के रूप में किया। विधेयक में बहुपत्नीकरण (पोलिगेमी) पर प्रतिबंध, साथ ही लव-इन संबंधों के पंजीकरण के लिए स्पष्ट नियम शामिल हैं। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिये विभिन्न प्रावधान जोड़े गए हैं, जिससे यह दावा किया गया है कि यह किसी भी धर्म के विरुद्ध नहीं है, बल्कि सामाजिक समानता को बढ़ावा देता है। विरोधी दलों ने इस विधेयक को संसद में विस्तृत बहस के बिना पास करने की कड़ी आलोचना की। उनका कहना है कि यूसीसी को लागू करने के लिये व्यापक सामाजिक संवाद और संधियों की आवश्यकता होती है, न कि आवाज़-मत जैसी जल्दी में ली गई प्रक्रिया। कई विपक्षी सांसदों ने कहा कि इस विधेयक से व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक स्वायत्तता पर प्रश्न उठते हैं, और यह असम में सामाजिक सामंजस्य को बाधित कर सकता है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय धर्मनिर्पेक्ष गठबंधन (एनडीए) के सदस्य इस बात पर ज़ोर देते हैं कि यूसीसी का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और सामाजिक बंधनों को तोड़ना है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से बहुपत्नीकरण पर प्रतिबंध और लव-इन रिश्तों का पंजीकरण, दोनों ही सामाजिक न्याय को बढ़ावा देंगे और किसी भी धर्म को लक्षित नहीं करेंगे। अब यह देखना बाकी है कि यह विधेयक असम में कानून बन कर किस हद तक लागू होगा, तथा इसका प्रभाव सामाजिक संरचना पर कितना गहरा पड़ेगा। उपसंहार में कहा जा सकता है कि आवाज़-मत से यूसीसी को पारित करना असम के राजनीतिक परिदृश्य में नई बहस का केंद्र बन गया है। जबकि सरकार इसे सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है, विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन के रूप में देख रहा है। इस विधेयक का भविष्य और इसके क़ानूनी कार्यान्वयन की दिशा, देर नहीं होगी तो असम के सामाजिक और धार्मिक ताने-बाने पर गहरा असर डालने की संभावना है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 27 May 2026